शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

कुर्बानियों के दौर में हम जी रहे हैं
रक्त बहता है मगर हम जी रहे हैं
हैं यहाँ कुरबान धरती पर सभी जो
देश की खातिर गरल हम पी रहे हैं ।।
============= आशावादी 

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

चलिए ....कुछ समाजसेवा करते हैं ....मैंने मित्र से कहा ।
समाजसेवा ...मतलब ...पहले अपनी ही सेवा कर लीजिए
बाद में समाजसेवा की सोचिए ।
सोचता हूँ अपना घर में बुजुर्गों की सेवा करूँ । मैंने कहा ।
क्या आप अपने घर में अपने माता पिता की सेवा करते
हैं ...? उसने कहा ।
मुझसे कोई ज़वाब देते न बना ।

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

देश भ्रष्टाचार के आकंठ में किस कदर डूबा हुआ है,इसका खुलासा रोज हो रहा है,अब कानून मंत्री जी का ट्रस्ट भी सवालों के घेरे में है,मैं नहीं कहता कि केजरीवाल और उनके समर्थक दूध से धुले हैं,मगर सवालों की ज़वाबदेही ज़िम्मेदार पदों पर बैठे दिशानायकों की कम नही है, लगता है कि कॉँग्रेस की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है,सारे आरोपों में कॉँग्रेस का हाथ ही भ्रष्टाचारी नज़र आ रहा है ।