शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

यह सियासत देश को किस स्तर तक निकृष्टता की ओर धकेलेगी,कहना मुश्किल है,क्योंकि मानवता को ठुकरा कर सियासत के सिपहसालार समाज को संकीर्णता में धकेल रहे हैं,धर्म,संप्रदाय और जातियों में जन मानस को बांटकर जो सियासत की जा रही है,वह समाज को जोड़ने वाली न होकर विघटनकारी है,जिसकी जितनी निंदा की जय,वह कम है ।====आशावादी 

सोमवार, 12 नवंबर 2012

तन समर्पित मन समर्पित 
और यह जीवन समर्पित 
लिख दिए हैं समर्पण गीत  
दीप के उत्सर्ग का संगीत 
राग उज्जवलता का दीपक गा रहा 
रूप उसका सबके मन को भा रहा 
दीप का उत्सव मनाएंगे सभी 
अब अँधेरे रह न पाएंगे कभी ।।
===============आशावादी