तन समर्पित मन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
लिख दिए हैं समर्पण गीत
दीप के उत्सर्ग का संगीत
राग उज्जवलता का दीपक गा रहा
रूप उसका सबके मन को भा रहा
दीप का उत्सव मनाएंगे सभी
अब अँधेरे रह न पाएंगे कभी ।।
===============आशावादी
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