शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

सच्ची बात चाहे कितनी भी कडवी हो,मगर सच्ची होती है ,सच्चाई सदैव मार्गदर्शक होती है,जिसे स्वीकार करके जीवन के लक्ष्यों को भले ही विलम्ब से प्राप्त करें,मगर उनकी प्राप्ति से जो सुख प्राप्त होता है,वह हजारों ,लाखों झूठ से प्राप्त सफलता से भी प्राप्त नहीं हो सकता,यह सुखद अनुभूति का विषय है,सो जीवन में सच को स्वीकारना ही जीवन का प्रथम एवं अंतिम उद्देश्य होना चाहिए ।
- सुधाकर आशावादी 

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