यह सियासत देश को किस स्तर तक निकृष्टता की ओर धकेलेगी,कहना मुश्किल है,क्योंकि मानवता को ठुकरा कर सियासत के सिपहसालार समाज को संकीर्णता में धकेल रहे हैं,धर्म,संप्रदाय और जातियों में जन मानस को बांटकर जो सियासत की जा रही है,वह समाज को जोड़ने वाली न होकर विघटनकारी है,जिसकी जितनी निंदा की जय,वह कम है ।====आशावादी
शुक्रवार, 16 नवंबर 2012
सोमवार, 12 नवंबर 2012
शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012
मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012
रविवार, 14 अक्टूबर 2012
देश भ्रष्टाचार के आकंठ में किस कदर डूबा हुआ है,इसका खुलासा रोज हो रहा है,अब कानून मंत्री जी का ट्रस्ट भी सवालों के घेरे में है,मैं नहीं कहता कि केजरीवाल और उनके समर्थक दूध से धुले हैं,मगर सवालों की ज़वाबदेही ज़िम्मेदार पदों पर बैठे दिशानायकों की कम नही है, लगता है कि कॉँग्रेस की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है,सारे आरोपों में कॉँग्रेस का हाथ ही भ्रष्टाचारी नज़र आ रहा है ।
मंगलवार, 18 सितंबर 2012
शुक्रवार, 14 सितंबर 2012
जाति व्यवस्था को सियासत ने समाज का कोढ़ बनाकर रख दिया है, पहले जातियाँ कर्म पर आधारित हुआ करती थी,शिक्षक को पंडित सरीखा सम्मान था,व्यापारी को वैश्य का सम्मान था ,सभी लोह सेठजी या लालाजी कहकर सम्मान प्रदर्शित करते थे,इस प्रकार मानव मात्र को कर्म से जोड़ा गया,अब कर्महीन लोग स्वार्थ के लिए जातियों में सिमट कर अलगावी भाषा बोल रहे हैं, इन नासमझों को कौन समझाए कि सियासत के डायनासोर इन्हें कच्चा चबाने की फ़िराक में हैं ।
मंगलवार, 4 सितंबर 2012
अलगाव की भाषा बोलने वालों की देश में कोई कमी नहीं है, अब राज ठाकरे को ही लीजिए,उनके पैरों तले धरती भी नहीं है और चले हैं महाराष्ट्र की ठेकेदारी करने,अपनी सियासत चमकाने के लिए अलगाव की राजनीति करने वाले तत्वों को आखिर देश कैसे स्वीकार कर रहा है ? सियासत चाहे अल्पसंख्यकों के नाम पर हो या क्षेत्रीयता के नाम पर,इसे किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए ।
गुरुवार, 30 अगस्त 2012
मुंबई हमलों के आरोपी आतंकी अजमल कसाब की फाँसी की सजा को माननीय उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है,संसद पर हमले में आतंकी अफज़ल गुरु को बरसो पहले से यही सज़ा दी जा चुकी है,मगर अभी तक इन दोनों आतंकियों के गले के लिए फाँसी का फंदा तैयार नहीं हुआ है,न जाने वह दिन कब आएगा,जब इन आतंकियों को सजा वास्तव में मिलेगी ?
रविवार, 26 अगस्त 2012
Ashawadi Post: देश के व्यंग्यकारों का एक नया नामकरण हुआ है एक सभा...
Ashawadi Post: देश के व्यंग्यकारों का एक नया नामकरण हुआ है एक सभा...: देश के व्यंग्यकारों का एक नया नामकरण हुआ है एक सभा में कहा गया कि व्यंग्यकार समाज के धोबी हैं मुझे इस नामकरण में दम लगा सो अपनी भी राय इस ब...
गुरुवार, 23 अगस्त 2012
चोरी और सीनाजोरी यदि इस कहावत को चरितार्थ होता हुआ देखना है तो कॉँग्रेस के आचरण में देख लीजिए ,कोयला आवंटन में हुई घपलेबाजी पर जब कॉँग्रेस चौतरफा घिर रही है तब कमान स्वयं सोनिया गाँधी ने संभाल ली है,उसने अपने युवा सांसदों को आगे करके इन हमलों का मुंहतोड़ ज़वाब देने के लिए कमर कस ली है ,निसंदेह इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी,जब सत्ता अपने कारनामों को छुपाने के लिए ओछी हरकतों पर उतर आये,समस्या यह भी है कि मौजूदा दौर में सशक्त विकल्प का न होना भी राष्ट्रघाती सिद्ध हो रहा है,जिसका लाभ कॉँग्रेस उठाने में पीछे नहीं है ।
रविवार, 1 जनवरी 2012
shubhkamnaye
आशावादी - चिन्तनं
तुम्हे जीना नहीं आया , हमें मरना नहीं आया
कडकती बिजलियाँ सम्मुख हमें डरना नहीं आया
हजारो अवसरों पर मौत से लड़कर भी जिंदा हैं
गिरें हैं और संभले हैं मगर गिरना नहीं भाया |
- डॉ. सुधाकर 'आशावादी '
तुम्हे जीना नहीं आया , हमें मरना नहीं आया
कडकती बिजलियाँ सम्मुख हमें डरना नहीं आया
हजारो अवसरों पर मौत से लड़कर भी जिंदा हैं
गिरें हैं और संभले हैं मगर गिरना नहीं भाया |
- डॉ. सुधाकर 'आशावादी '
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